रेरा यानि रियल एस्टेट एक्ट में डेवलपर्स के लिए जमीन के मालिकाना हक का बिमा कराना जरुरी है लेकिन बहुत कम डेवलपर्स है जिन्होने ये बीमा कराया है । इसके पीछे जो वजह सामने आ रही है वो ये कि इससे डेवलपर्स पर बोझ बढ जाएगा साथ ही घरों की कीमत भी 150 से 200 रुपये प्रति वर्ग फुट बढ जाएगी । दरअसल जमीन का मामला राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है । इसलिए केनद्र सरकार के रेरा को हर राज्य अपने यहा नोटिफाई करना है । लेकिन किसी भी राज्य ने टाइटल इश्योरेंस को नोटिफाई नहीं किया है हालांकि महाराष्ट्र इकलौता राज्य है जिसने इसके नोटिफिकेशन के लिए हामी भरी है और वादा किया है कि वो जल्द ही नोटिफिकेशन जारी करेगा ।
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दरअसल डेवलप्रस का मानना है कि बीमा का खर्च फिलहाल ज्यादा है भविष्य में हो सकता है कि इसका खर्च कम हो…और वो भी तब होगा जब बीमा लेने वालों की संख्या बढेगी लेकिन फिलहाल कम संख्या होने की वजह से प्रीमियम ज्यादा है । हालाकि अगर डेवलपर्स इस बीमें की रकम के खर्च को ग्राहकों से ही वसूलेगा लेकिन फिलहाल तो ये पैसा उसे ही चुकाना है ।

टाइटल इंश्योरेंस में जोखिम का एक हिस्सा ही कवर होता है सारे जोखिम कवर नहीं होते लेकिन बीमा कंपनियों का कहना है कि डेवलपर्स को इसके लांग टर्म फायदों को समझना होगा । इस बीमा से खरीदारों में डेवलपर्स की विश्वसनीयता बढेगी ।

टाइटल इंश्योरेंस का प्रावधान रेरा एक्ट के सेक्शन 16 में किया गया है । इसके मुताबिक डेवलपर्स को जमीन और बिल्डिंग के मालिकाना हक का बीमा कराना पड़ेगा । डेवलपर्स को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट कंसट्रक्शन का भी बीमा लेना होगा…इसका प्रीमियम डेवलपर्स देगा । डेवलपर्स को एलॉटी यानि खरीदार को बीमा ट्रांसफर करने से पहले प्रीमियम का भुगतान करना होगा । खरीदार और डेवलपर्स के बीच सेल एग्रीमेंट के साथ ही बीमा करीदार को ट्रांसफर होगा । डेवलपर्स खरीदार को बीमा के कागजात बी सौंपेगा ।

भारत के लिए प्रापर्टी टाइटल इंश्योरेंस बेशक नया हो लेकिन कनाडा, आष्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेंच यूरोप के कई देशों में इसका प्रावधान है । भारत में अभी सिर्फ दो कपंनिया ही मालिकाना हक का बीमा करती है ।

इसमें सबसे बडी बात ये है कि भविष्य में प्रापर्टी के मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद हुआ तो खरीदार को भरपाई हो सकती है और साथ ही रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश भी सुरक्षित होगा । क्योकि ये देखने में आया है कि मालिकाना हक स्पस्ट ना होने के कारण कई विवाद होते रहते है और अगर इसका बीमा हो जाएंगा तो फिर इसमें पारदर्शिता बढेगी ।
रियल एस्टेट सेक्टर में हर साल 3.5 लाख करोड़ के सौदे होते है । और जिस बीमे की बात हो रही है वो बीमा सिर्फ जमीन की कीमत का नहीं बल्कि प्रोजेक्ट की पूरी डेवलपमेंट वैल्यू का होगा । 2 प्रतिशत के हिसाब से भी जोड़े तो हर साल कंपनियों को 7 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम देना होगा । और इसका सीधा प्रभाव घरों की कीमत पर पड़ेगा…जो कि 150 से 200 रुपये प्रति वर्ग फीट बढ जाएंगी ।

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