अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रिसर्च के मुताबित स्टुडेंट में टेक्नोलॉजी की लत तेजी से बढती जा रही है औसतन वे दिम में 150 बार अपना मोबाइल चेक करते है कॉलिंग के अलावा वे अपने फोन का इस्तेमाल सोशल नेटवर्क्स गूगल सर्च एंटरटेनेंट या फिर एप्स को यूज करने के लिए तो कर ही रहे है लेकिन रिसर्च कहती है कि एंजाइटी और फियर ऑफ मिसिंग आउट ऐसी दो वजहें है जिनके चलते भी युवा बार बार अपना फोन चेक करते है । इसमें कोई शक नहीं कि अब डिजिटल डिवाइसेज रोजमर्रा के कामों को आसान बना रहे हैं लेकिन इनका लगातार इस्तेमाल करते हुए कब आप इनके आदी हो चुके होंगे आपको पता भी नहीं चल पाएगा ।
फेसबुक एडिक्शन डिसआर्डर –
अगर आप फेसबुक पर लगातार पिक्चर पोस्ट करने के शौकीन है और हमेशा आपको अपने दोस्तों की पोस्ट की जरुरत से ज्यादा इंतजार रहता है तो इसका अर्थ है कि फेसबुक एडिशनल डिसआर्डर आप पर प्रभावी है इसके चलते आप आप अपनी पिक्चर की रेटिंग भी दूसरे सोशल मीडिया यूजर्स के रेस्पांस के आधार पर करते है ।
इंटरनेट गेमिंग डिसआर्डर
अगर आप घंटों कैंडी क्रश या फीफा ऑनलाइन या अन्य गेम्स खेलते है तो आईजीडी के बारे में जानना आपके लिए जरुरी है । जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन गेम्स खेलने की इच्छा और दूसरे सोशल मीडिया यूजर्स को गेम के लिए रिक्वेस्ट भेजने की आदत होने का मतलब है कि आप इस डिस आर्डर से पीडित है ।
सेल्फिटिस
सेल्फी लेना और पोस्ट करने से जुड़ा डिसऑर्डर है अगर आप लगातार सेल्फी लेकर उसे इंस्टाग्रामफेसबुक स्नैपचैट और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्ट करते रहते है और अन्य सोशल साइट्स पर पोस्ट करते रहते है तो संभवत आप इस डिसआर्डर की ओर बढ रहे है ।
नामोंफोबिया
नोमोंफोबिया का अर्थ है अपने फोन का उपयोग करने में संक्षम ना होने का डर । सिग्नल का ना आना या बैटरी लो होने की वजह से अगर आप फिक्रमंद हो उठते है तो ये नामोफोबिया के लक्षण है । विशेषज्ञो के मुताबिक अब हम ऐसी स्थिति में है जहां डिवाइसेज से हमारा लगाव अस्वस्थ्य है और इस डर का असर काम पर भी होता है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here