रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नार्थ अमेरिका यानि साइंस डेली की रिपोर्ट ने चौकाने वाले खुलासे किए है । उसके मुताबित देश और दुनिया में आई मोबाइल क्रांति हमारे लिए बड़े खतरे ला रही है..इस देश का 40 प्रतिशत युवा हर दिन 24 में से 6 घंटे मोबाइल को दे रहा है । 74 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स हाथ में अपना मोबाइल रखकर सो जाते है । दिन में औसतन 150 बार फोन चेक करते है हम । 67 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स तब भी फोन चेक करते रहते है जब घंटी ना बजे मैसेज ना आए या नोटिफिकेशन न आए।

महिलाओं और टिनेजर्स का तो और भी बुरा हाल है..महिला स्मार्टफोन यूजर्स 29 % कम है लेकिन फोन को सिर्फ औसतन 14 मिनट ज्यादा समय दे रही है । 80 प्रतिशत समय सिर्फ सोशल साइट्स पर यू ट्यूब पर यानि पुरूषों से दोगुना वक्त दे रही है । 14 प्रतिशत महिलाओं को सिरदर्द अनिद्रा और चक्कर आने की शिकायत हो रही है ।
mobile adiction

इस सबके बीच बच्चों की जिंदगी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है माता पिता इस मोबाइल के चक्कर में बच्चों पर ध्यान नही दे पा रहे है। जर्मनी के हैम्बर्ग में एक सात साल के बच्चे ने विरोध मार्च निकाला..बच्चे का ये विरोध पिता के साथ साथ उन सभी अभिभावकों के खिलाफ था जो मोबाइल का ज्यादा वक्त देते है इस बच्चे ने स्लोगन लिखा प्ले विद मी,नॉट विद योर मोबाइल ।
दरअसल दुनिया की तो तिहाई आपादी मोबाइल से कनेक्ट है । यानि तकरीबन पांच सौ करोड़ लोग । और इसमं भारत की हिस्से सबसे ज्यादा है..जल्द ही ये आकड़ा सौ करोड़ के पार हो जाएंगा…।।
ऐसे में मोबाइल..सुविधाओं के साथ साथ समस्या का बड़ा कारण बन रहा है ।

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