जहां महानायक राजकपूर ‘आवारा’ हुए ,जहां राजकपूर ‘श्री 420’ बने, जहा राजकपूर ने ‘आग’ और ‘बरसात’ बनाई । राजकपूर की वो ‘अमर निशानी’ बिकने जा रही है..।

रुपहले पर्दे से थोड़ी भी मोहब्बत होगी..तो आर के स्टूडियों का आपने नाम भी सुना होगा और काम भी देखा होगा.हिन्दी सिनेमा के इतिहास में इस स्टूडियों से…ऐसी ऐसी फिल्में बनकर निकली है..जिनकी मिसाले दी जाती है । मुंबई के चैंबूर में…मौजूद आर के स्टूडियों हिन्दी सिनेमा का.. वो सुनहरा इतिहास अपने में समेटे हुए है…जब राजकपूर जैसे सितारे का रुपहले पर्दे पर बोलबाला था..बीते सत्तर साल में इस स्टूडियों ने अपने चमकते दमकते..दिन भी देखे और..वो दिन भी देख रहा है जब..लोग इस स्टूडियो के सामने से बिना आंख फेरे आगे बढ जाते है ।जब तक राजकपूर थे…तब तक इस स्टूडियो का पूरे बॉलीवुड में सिक्का था लेकिन उनके जाने के बाद…RK STUDIO..बेजान होता चला गया । और इतना बेजान…कि हो सकता इस स्टूडियो का नाम ही खत्म हो जाए । जी हां…खबर है कि…कपूर खानदान अब इस आर के स्टूडियों को बेचने जा रहा है ।
शो मैन के नाम से मशहूर फ़िल्मकार राज कपूर ने अपनी ज़्यादातार फ़िल्मों की शूटिंग क़रीब 2 एकड़ में बने इसी स्टूडियो में की थी..राजकपूर एक अभिनेता के साथ साथ निर्माता और निर्देशक भी थे । सन् 1935 में महज 11 साल की उम्र में राजकपूर ने फ़िल्म इंकलाब से अभिनय की शुरुवात की । राजकपूर बांबे टाकीज़ स्टुडिओ में हेल्पर का काम करते थे । बाद में वो केदार शर्मा के साथ क्लैपर ब्वाय का काम करने लगे । दरअसल पिता पृथ्वीराज कपूर को ये भरोसा नहीं था कि राज कपूर अपनी जिंदगी में कुछ खास कर पाएंगे इसीलिये उन्होंने राजकपूर हेल्पर औऱ क्लैपर ब्वाय जैसे छोटे काम में ही लगवा दिया था ।
लेकिन…उन्हे क्या मालूम था कि..उनका यही बेटा एक दिन फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा शोमैन बनेगा । केदार शर्मा ने राज कपूर के कलाकार को पहचाना और 1947 में अपनी फ़िल्म नीलकमल में हीरो बना दिया । इस फिल्म के बाद अगले ही साल यानि 1948 में अपने स्टूडियो आर के फिल्मस की स्थापना कर दी…इस दौरान राजकपूर की उम्र महज 24 साल थी । और राजकपूर उस दौर के सबसे कम उम्र के निर्देशक बन गये थे…सन् 1948 में इसी आर के स्टूडियो से अपनी पहली फिल्म ‘आग’ का निर्देशन किया जो अपने वक्त की सफलतम फ़िल्म रही.। उसके बाद राजकपूर ने सुपरहिट फिल्म बरसात की शूंटिंग भी इसी स्टूडियों में की । आर के स्टूडियो में जो आप ये लोगो देख रहे है…दरअसल ये फिल्म बरसात के ही सीन से लिया गया है…जिसमें नर्गिस और राजकपूर फिल्म के एक सीन में ऐसे ही पोस दे रहे है ।

ये सीन राजकपूर को इतना पसंद आया कि उन्होने इस स्टूडियों के लोगों को उसी सीन के जैसा डिजायन करवा दिया…दो एकड़ में फैले इस भव्य स्टूडियो..में साल 1951 में आवारा की शूटिंग हुई । 1954 में फिल्म बूट पॉलिस की शूटिंग हुई. 1955 में श्री 420..की शूटिंग की..1956 में जागते रहो….की भी शूटिंग इसी स्टूडियों में हुई । सफलता का पर्याय बन गया शो मैन राजकपूर का आर के स्टूडियो….ये श्री 420 की सक्सेस पार्टी की तस्वीरे है…तस्वीरों में आप राजकपूर को देख सकते है. ।दरअसल राजकपूर ने जिंदा रहते इस आर के स्टूडियों में दो प्रथाओं को शुरु किया था…पहली थी गणपति स्थापना…। भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा आर के स्टूडियों में बिठाई जाती थी…पूरा आर के स्टूडियों रोशनी से नहा जाता था…।। आज भी आर के स्टूडियों में भगवान गणेश की प्रतिमा रखी जाती है…और इस दौरान कपूर खानदान उत्सव में शामिल होता है…ये तस्वीरे साल 2016 की है जिसमें रणवीर कपूर..के साथ रणधीर कपूर और राजीव कपूर मौजूद है….।।

ऐसे ही..आर के स्टूडियों में जो दूसरी परंपरा थी वो थी होली की । आर के स्टूडियों की होली के बारे में तो कहा जाता है कि वैसी होली.पूरी मुंबई में कहीं नहीं होती थी । फिल्म इंडस्ट्री का हर सितारा आर के स्टूडियों की होली में शरीक होता था..। कहते है कि इस होली में…मीडिया के कैमरों की एन्ट्री नहीं होती थी…और पूरे दिन…जश्न का माहौल होता था.।

इस स्टूडियो में राजकपूर के जिंदा रहते जो सबसे आखिरी फिल्म की शूटिंग हुई वो थी राम तेरी गंगा मैली.लेकिन इस फिल्म के बीच में ही अस्थमा की शिकायत के चलते 2 जून 1988 को राजकपूर इस दुनिया को छोड़ कर चले गए । 1988 से आज 2018 के बीच….30 साल का वक्त हो गया…।। इन तीस सालों में…राजकपूर का आर के स्टूडियों…धीरे धीरे..अपना नाम अपनी पहचान…खोता चला गया…।। दरअसल सबसे बड़ा सेटबैक इस स्टूडियों के लिए साल 2017 का सितंबर महीना रहा…जब इस स्टूडियों में आग लग गई….और पूरा स्टूडियों जल कर खाक हो गया.।

इस आग ने शो मैन के आर के स्टूडियों की पहचान ही राख कर दी…स्टूडियों में अभिनेत्रियों के कॉस्टूयम्स, ज्वैलरी जल कर खाक हो गई । मेरा नाम जोकर का जो मशहूर क्लोन मास्क था वो भी जलकर राख हो गया..।। जिस देश में गंगा बहती है की बंदूकें और आवारा, संगम और बॉबी में इस्तेमाल हुआ ग्रैंड पियानो भी इस आग की भेंट चढ गया । दरअसल..शूटिंग लोकेशन के लिए अब लोग इतनी दूर चैंबूर में नहीं आते…लिहाजा स्टूडियों का मैटेंनेसं कपूर खानदान को महगा पड़ रहा है । इस परिवार ने इसे एक दो बार पहले रिनोवेट भी कराया लेकिन साल 2017 की आग ने इस स्टूडियों को बहुत ज्यादा नुकसान पंहुचाया है । जब राजकपूर थे तो वो 90 फिसदी फिल्मों का निर्माण इसी स्टूडियों में करते थे लेकिन अब..हालात और वक्त बदल गया है…फिल्मों की टेक्नोलॉजी में भी काफी बदलाव आए है जिसकी वजह से..आर के स्टूडियों..इस रेस में पिछड़ता चला गया । लिहाजा राजकपूर की पत्नी..कृष्णा राज कपूर ने अपने बेटे रणधीर और ऋषि कपूर के साथ दोनों बेटिया रितु नंदा और रीमा जैन ने मिलकर अब ये फैसला कर लिया है कि वो इस स्टूडियों को बेच देंगे ।

बिल्डर्स डेवलपर्स और कार्पोरेट से लगातार संपर्क किया जा रहा है । हालांकि कपूर खानदान के लिए ये फैसला लेना आसान नहीं था..।। ऋषि कपूर ने इस फैसले पर कहा है कि वो इस फैसले से दुखी है लेकिन दिल पर पत्थर रखकर उन्हे ये फैसला लेना पड़ रहा है । क्योकि हर बार ये मुमकिन नहीं होता कि सारी चीजे आपके हिसाब से चले । हालांकि…आर के स्टूडियों और उस स्टूडियों से जुड़ी यादों को सहेजने और चाहने वालों के लिए सुकून की बात ये है कि..कपूर खानदान इस स्टूडियों के आधे हिस्से यानि एक एकड़ को ही बेचने जा रहा है बाकि के आधे हिस्से को…वो दोबारा रिनोवेट करके…उसके वजूद को बनाए रखेगा ।